दुनिया में सपने तो सब देखते हैं, लेकिन उन्हें हकीकत में बदलने का जुनून कुछ ही लोगों में होता है। अक्सर लोग मुसीबत आने पर हाथ खड़े कर देते हैं, लेकिन कुछ जिद्दी लोग ऐसे भी होते हैं जो हर हार को चुनौती समझते हैं।
PVR के संस्थापक अजय बिजली भी कुछ ऐसे ही मिजाज के इंसान थे। जिन्होंने भारत को पीवीआर सिनेमा का लजीज स्वाद चखाया। चलिए जानते हैं पीवीआर सिनेमा की शुरुआत करने वाले अजय बिजली की पूरी कहानी क्या है? और इन्होंने किन कठिनाइयों का सामना करते हुए यह मुकाम हासिल किया है?
पिता के बिज़नेस से हटकर चुनी अपनी राह
अजय बिजली का जन्म 1967 में नई दिल्ली में हुआ था। उन्होंने मॉडर्न स्कूल, दिल्ली से अपनी शुरुआती पढ़ाई पूरी की। आगे चलकर हिंदू कॉलेज दिल्ली विश्वविद्यालय से बैचलर ऑफ कॉमर्स की पढ़ाई पूरी की। पढ़ाई के दौरान ही उन्हें बिजनेस और मैनेजमेंट की काफी अच्छी समझ हो गई थी।
आगे चलकर साल 1988 में उन्होंने अपने पिता के ट्रांसपोर्ट बिजनेस अमृतसर ट्रांसपोर्ट कंपनी को ज्वाइन किया। कुछ सालों तक इस कंपनी में काम करने के बाद उन्होंने कुछ हटकर करने की इच्छा जाहिर की। साल 1990 में शादी के बाद उन्होंने अपने पुराने प्रिया सिनेमा में रुचि दिखाई। जो लंबे समय से घाटे में चल रहा था।
प्रिया सिनेमा दर्शकों की भी दिलचस्पी खो चुका था। लोग भूल चुके थे, मगर अजय बिजली ने इसे फिर से ताजा बनाया।
प्रिया सिनेमा के साथ नई शुरुआत
अजय बिजली ने मुंबई के स्टर्लिंग सिनेमा की प्रेरणा लेकर प्रिया सिनेमा को पूरी तरह से बदलने का फैसला किया। उन्होंने डॉल्बी साउंड सिस्टम लगाया, इंटीरियर को सुधारा और वॉशरूम से लेकर स्टाफ की ड्रेस तक सब कुछ नए सिरे से डिजाइन किया। अब प्रिया सिनेमा लोगों का ध्यान खींचने लगा था।
इस समय दिल्ली के लोग बॉलीवुड के बजाय हॉलीवुड फिल्मों को ज्यादा प्राथमिकता दे रहे थे। इसी दौरान सरकार ने टिकट की कीमतों पर से भी अपना नियंत्रण छोड़ दिया था। जिसके बाद प्रिया सिनेमा की लोकप्रियता दिनों दिन बढ़ने लगी थी।
पिता के बाद बढ़ गई जिम्मेदारियां
सब कुछ ठीक-ठाक चल रहा था, मगर साल 1992 में अजय के पिता का निधन हो गया। जिससे ट्रांसपोर्ट और सिनेमा दोनों बिजनेस की जिम्मेदारी अकेले अजय के कंधों पर आ गई। इसके कुछ महीनों बाद ही आग दुर्घटना के कारण ट्रांसपोर्ट बिजनेस पूरी तरह से डूब गया।
अब अजय ने ठान लिया कि अब वे अपना पूरा समय केवल सिनेमा इंडस्ट्री को ही देंगे। उन्होंने पारंपरिक सिंगल स्क्रीन से हटकर सोचने की हिम्मत की और भारत में पहली बार मल्टीप्लेक्स का कॉन्सेप्ट पेश किया।
भारत में पीवीआर सिनेमा की शुरुआत
अजय बिजली ने ही भारत में मल्टीप्लेक्स सिनेमा का चलन शुरू किया। इसके लिए उन्होंने ऑस्ट्रेलिया की प्रसिद्ध कंपनी विलेज रोडशो से हाथ मिलाया। इसके लिए अजय ने अपने दोस्त जॉन क्रॉफर्ड के साथ साझेदारी में एक ज्वाइंट वेंचर बनाया। जिसका नाम प्रिया विलेज रोडशो पीवीआर था। जिसमें 60% हिस्सेदारी अजय की और 40% विलेज रोडशो की थी।
साल 1997 में दिल्ली के साकेत स्थित अनुपम सिनेमा को लीज पर लेकर भारत का पहला मल्टीप्लेक्स पीवीआर सिनेमा लॉन्च किया। एक ही छत के नीचे चार स्क्रीन हर दिन 24 शो… उस जमाने में यह एक क्रांतिकारी कदम था।
9/11 हमलें के बाद बदली राह
पीवीआर की सफलता के बाद दिल्ली के विकासपुरी और नारायणा जैसे इलाकों में कई नए मल्टीप्लेक्स खुल चुके थे। लेकिन साल 2001 में 9/11 आतंकी हमले के बाद पूरी दुनिया भर में वैश्विक मंदी आ गई। जिसके कारण विलेज रोडशो ने भारत से अपने पांव समेटने का फैसला कर लिया। जिसके कारण अजय बिजली की जिम्मेदारी और बढ़ गई। क्योंकि इस वक्त उन्हें 100 करोड़ के प्रोजेक्ट और 50 स्क्रीन की जिम्मेदारी उठानी थी। यह एक बड़ा जोखिम था, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी।
अजय बिजली ने एयरटेल के सुनील मित्तल की सलाह पर आईसीआईसीआई वेंचर से करीब 80 करोड़ का लोन लिया। साथ ही अपनी निजी संपत्तियों को भी बेचकर पैसे इकट्ठा किया और भारत की पहली पीवीआर कंपनी की स्थापना कर डाली।
अब पीवीआर केवल दिल्ली तक की सीमित नहीं रहा, बल्कि बेंगलुरु, मुंबई, हैदराबाद और चेन्नई जैसे बड़े शहरों में भी मल्टीप्लेक्स खुल चुके थे। साल 2006 में पीवीआर ने अपना आईपीओ लाया। जिससे करीब 128 करोड़ रुपए जुटाए। इन पैसों से कंपनी की आगे की योजनाओं को मजबूती दी।
कोरोना बना मुसीबत
सब कुछ ठीक-ठाक चल रहा था। अजय बिजली अपने बिजनेस को लगातार फैला रहे थे। मगर साल 2020 में कोरोना महामारी ने एक बार फिर आर्थिक झटका दिया। कोरोना ने सिनेमाघर कई महीनों के लिए बंद कर दिए। जिसके चलते इंडस्ट्री को बड़ा आर्थिक झटका लगा। लेकिन मजबूत लीडरशिप, लागत नियंत्रण और दर्शकों का भरोसा कुछ सालों बाद फिर से लौट आया। आज के समय में प्रिया विलेज रोडशो की मार्केट वैल्यू 100 अरब को पार कर चुकी है।
अजय बिजली की सफलता की कहानी से एक बात तो साफ हो जाती है कि धैर्य, सही समय पर लिए गए फैसले और हिम्मत से इंसान कुछ भी कर सकता है।












