क्या हो आपको एकदम से आपके पुराने जन्म की यादें लौट आए। वही पुराने रिश्ते, यादें और मौत की वजह। सब कुछ एकदम से रील की तरह आंखों के सामने चलने लगे। यह सुनने में तो एक तरह से किसी साइंस फिक्शन फिल्म की कहानी जैसा लगता है। लेकिन भारत में ऐसे कई मामले सामने आ चुके हैं, जिनमें बच्चों को अपना पुराना जन्म याद आ चुका हो। ये बच्चे पिछले जन्म में किसी दुर्घटना में मर चुके थे। लेकिन भगवान ने इन्हें फिर से अपना जीवन जीने का मौका दिया और इनका पुनर्जन्म हुआ।
इन लोगों को अपने पिछले जन्म की सभी घटनाएं सटीक याद हैं। अपना पुराना नाम, जगह और रिश्ते सब कुछ वैसे के वैसे याद हैं जैसे पिछले जन्म में थे। यह कोई आम घटना नहीं थी इस पुनर्जन्म की घटनाओं ने वैज्ञानिकों तक के होश उड़ा दिए।
Khabardaari.com की इस रहस्यमई पड़ताल में हम भारत की उन पांच चौंका देने वाली घटनाओं की जानकारी देंगे। जिनमें न केवल लोगों ने दावा किया है कि उनका पुनर्जन्म हुआ है, बल्कि इसके ठोस प्रमाण भी मिले हैं।
हरियाणा के राहुल का पुनर्जन्म
हरियाणा के पलवल जिले के गढ़ी पट्टी गांव में रहने वाले 10 साल के राहुल को अचानक से अपना पुराना जन्म याद आ गया। उसने दावा किया कि वह राहुल नहीं बल्कि धनराज है। 11 साल पहले चंडीगढ़ में एक सड़क हादसे में उसकी मौत हो गई थी। शुरुआत में तो सभी को लगा कि बच्चा है कुछ भी बोलता है। लेकिन उसने अपने पिछले जन्म के गांव और घर तक का रास्ता बताया। वह पुराने घर तक पहुंचा और वहां मौजूद 45 वर्षीय महिला को अपनी पत्नी बताने लगा। बच्चों और दोस्तों के नाम लेकर पुकारने लगा और उन्हें इस जन्म में भी पहचान लिया।
राहुल ने बताया कि मौत के करीब 10 साल बाद तक वह इसी दुनिया में भटकता रहा और मौत के 12 दिन तक घर के आंगन में मौजूद पेड़ पर उसकी आत्मा बैठी रही थी। फिर 10 साल बाद जाकर उसका पुनर्जन्म हुआ। इस घटना ने न केवल लोगों के बल्कि वैज्ञानिकों के दावों तक को चैलेंज किया।
राजस्थान की किंजल ने बताई कैसे हुई थी पिछले जन्म में मौत
पुनर्जन्म की एक और घटना राजस्थान से सामने आई। जिसमें 4 साल की किंजल ने बहुत कम उम्र में ही अपने पुराने जन्म का पर्चा खोल दिया। उसने बताया कि पिछले जन्म में वह गैस ब्लास्ट में जलकर मर गई थी।
राजसमंद जिले के नाथद्वारा से सटा गांव परवल है। यहां के रतन सिंह चुंडावत की पांच बेटियां हैं। इनमें से सबसे छोटी बेटी 4 साल की किंजल बार-बार अपने भाई से मिलने की जिद कर रही थी। शुरुआत में किसी ने इस पर ध्यान नहीं दिया। लेकिन आगे चलकर किंजल का सिलसिला बढ़ता गया।
किंजल से पूछने पर पुनर्जन्म की घटना का खुलासा हुआ। किंजल ने अपने आप को मौजूद गांव से 30 किलोमीटर दूर की ऊषा (पिछले जन्म में 30 वर्ष की उम्र) बताया। किंजल ने अपने पिछले जन्म के माता-पिता, दोस्त और घर सब कुछ बताया। यह मामला इतना गंभीर हो गया था कि पुलिस और मनोवैज्ञानिकों ने भी इसकी जांच की। लेकिन कोई ठोस और वैज्ञानिक जवाब नहीं मिला।
मथुरा की लुगदी देवी दिल्ली की शांति देवी बनाकर लौटी
मथुरा की रहने वाली लुगदी देवी को 25 सितंबर 1925 को एक बेटे ने जन्म दिया। मगर दुर्भाग्यवस प्रसव समस्याओं के कारण 9 दिन बाद 4 अक्टूबर 1925 को लुगदी देवी की मौत हो गई।
इस घटना के ठीक 22 महीने बाद 11 दिसंबर 1926 को दिल्ली के बाबू रंग बहादुर माथुर के घर एक लड़की का जन्म हुआ। जिसका नाम शांति रखा गया। 4 साल की उम्र तक शांति ने कुछ भी नहीं बोला। लेकिन इसके बाद अचानक से वह अपने पिछले जन्म से जुड़ी बातें करने लगी। उसके बोलने का ढंग इतना अलग था, जो किसी छोटी बच्ची के लिए नामुमकिन लगता है।
उसने 4 साल की उम्र में ही मथुरा और अपने पति केदारनाथ चौबे, उनकी कपड़े की दुकान, घर के भीतर की बनावट और यहां तक कि कुछ गुप्त बातों के बारे में बताया। जो केवल लुगदी को ही पता थी।
शांति देवी को मथुरा ले जाया गया। उसने कथित तौर पर अपने पूर्व जन्म के परिवार के सदस्यों को भी पहचान लिया और वहां मौजूद लोगों ने भी कई घटनाओं की पुष्टि की। मामले ने पूरे देश का ध्यान खींचा और महात्मा गांधी ने भी इस मामले में रुचि दिखाई।
इसके बाद 15 सदस्यों की एक समिति बनाई गई। जिसने इस घटना की जांच की। हालांकि इन 15 लोगों ने इसे संयोग बताया। जबकि कई विद्वानों ने माना की वे इतने सक्षम नहीं है कि इस घटना के रहस्य उजागर कर सके। 27 दिसंबर 1987 को 61 वर्ष की आयु में शांति देवी का निधन हो गया। मगर आज भी उनकी पुनर्जन्म की घटना उलझी हुई है।
कैलिफोर्निया की योगा टीचर का भारत में पुनर्जन्म
Khabardaari.com की इस रहस्यमई पड़ताल में अब हम जिन घटनाओं का जिक्र करने वाले हैं, उन पर शायद आपको भी यकीन ना हो। क्योंकि इस बार पुनर्जन्म की घटनाएं भारत के अंदर नहीं बल्कि विदेश से भारत की है।
राजस्थान के बीकानेर और सूरत से सामने आई दो छोटी बच्चियों की कहानी लोगों को हैरान कर रही है। दोनों ही बच्चियों का नाम तृषा बताया जा रहा है। उम्र करीब 3 से 3.5 साल है और सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि उन्होंने कभी स्कूल नहीं देखी, न ही घर में कोई अंग्रेजी बोलता है फिर भी दोनों तृषा अमेरिकी और ब्रिटिश एक्सेंट में अंग्रेजी बोलती हैं।
सूरत की तृषा के पिता बताते हैं की शुरू में उन्हें लगा के ये सामान्य शब्द होंगे। लेकिन जैसे बच्ची बड़ी हुई उसकी बॉडी लैंग्वेज, खाने पीने का तरीका और बोलने का लहजा पूरी तरह से अमेरिकी कल्चर के हिसाब से हो गया। जबकि बीकानेर की तृषा खुद को कैलिफोर्निया में रहने वाली योगा टीचर बताती है। उसने बताया कि वह कैलिफोर्निया की है और पिछले जन्म में वह लोगों को योगा क्लासेस देती थी।
इन दोनों घटनाओं को भारत के सबसे बड़े न्यूज़ नेटवर्क न्यूज़ तक ने भी कवर किया है। हालांकि इस पर कोई वैज्ञानिक प्रमाण सामने नहीं आया कि इनका पुनर्जन्म ही हुआ है। मगर स्थिति को देखते हुए इस बात से कोई नकार भी नहीं सकता कि इनका पुनर्जन्म नहीं हुआ है।







