Netflix Revenue Model Explained: करोड़ों की सीरीज बनाकर अरबों की कमाई कैसे करता है Netflix?

By: महेश चौधरी

Last Update: January 12, 2026 10:37 AM

Netflix Revenue Model
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Netflix Revenue Model Explained: आज Netflix सिर्फ एक OTT प्लेटफॉर्म नहीं, बल्कि एक ग्लोबल एंटरटेनमेंट पावरहाउस बन चुका है। दुनिया के 190 से ज्यादा देशों में मौजूद नेटफ्लिक्स हर साल अरबों डॉलर का रेवेन्यू जनरेट करता है। करोड़ों रुपये में बनने वाली वेब सीरीज़, इंटरनेशनल स्टारकास्ट, हाई-एंड VFX और भारी मार्केटिंग यह सब देखने में एक बेहद रिस्की बिज़नेस लगता है। लेकिन असलियत यह है कि नेटफ्लिक्स ने कंटेंट को खर्च नहीं, बल्कि Multi-layer Revenue Engine में बदल दिया है। यही वजह है कि भारी निवेश के बावजूद कंपनी लगातार मुनाफे की दिशा में आगे बढ़ रही है।

Khabardaari.com की इस रिपोर्ट में हम विस्तार से समझेंगे कि Netflix Revenue Model को और उसका बिज़नेस मॉडल क्यों इतना मजबूत माना जाता है।

यूजर सब्सक्रिप्शन है Netflix Revenue Model का सबसे मजबूत आधार

जैसा कि हमने बताया कि नेटफ्लिक्स की कमाई का सबसे मजबूत आधार सब्सक्रिप्शन मॉडल (सब्सक्रिप्शन वीडियो ऑन डिमांड) है। जिसमें यूजर हर महीने या सालाना अनलिमिटेड फिल्में या वेब सीरीज देखने के लिए एक तय रकम नेटफ्लिक्स को सब्सक्रिप्शन के तहत देता है। नेटफ्लिक्स ने अपने यूजर्स की जरूरतों को समझते हुए कई सब्सक्रिप्शन प्लान पेश किए हैं। जो भारत में सबसे कम 149 रुपए प्रति महीना और सबसे ज्यादा 649+ रुपए प्रति महीना तक पहुंचता है।

कंटेंट लाइसेंसिंग से कमाई

नेटफ्लिक्स अपने कंटेंट को सिर्फ अपने प्लेटफॉर्म तक सीमित नहीं रखता, बल्कि उसे लाइसेंस पर बेचकर भी कमाई करता है। कई Netflix Originals को लोकल टीवी चैनलों, रीजनल OTT प्लेटफॉर्म्स, एयरलाइंस और होटल नेटवर्क्स को सीमित समय के लिए दिया जाता है। इससे नेटफ्लिक्स को बिना कोई नया खर्च किए उसी शो या फिल्म से दोबारा रेवेन्यू मिलता है। खासतौर पर उन देशों में यह मॉडल फायदेमंद साबित होता है, जहाँ नेटफ्लिक्स की सीधी पहुंच कम है लेकिन उसका कंटेंट लोकप्रिय है। यह रणनीति कंटेंट की लाइफ और कमाई दोनों बढ़ा देती है।

विज्ञापन दिखाकर भी होती है अच्छी कमाई

हाल के कुछ वर्षों में नेटफ्लिक्स ने अपने कम कीमत वाले सब्सक्रिप्शन प्लान में एक छोटा सा बदलाव किया है। जिसमें यूजर कम पैसे देकर भी प्रीमियम कंटेंट देख सकता है। लेकिन इसमें यूजर को बीच-बीच में कुछ विज्ञापन देखने पड़ते हैं। जिससे नेटफ्लिक्स को दोहरा लाभ होता है। एक तो यूजर सस्ता ही सही लेकिन सब्सक्रिप्शन प्लान ले लेता है। साथ ही विज्ञापन भी देखता है। इससे नेटफ्लिक्स को विज्ञापन दाताओं से भी पैसा मिलता है और दशकों से भी।

प्रोडक्ट प्लेसमेंट और ब्रांड इंटीग्रेशन

कोई भी फिल्म या वेब सीरीज देखते समय आपने गौर किया होगा कि बीच-बीच में कार, ड्रिंक, मोबाइल, कपड़े या किसी खास ब्रांड का कोई न कोई प्रोडक्ट सीरीज में इस्तेमाल किया जाता है। इसे ही प्रोडक्ट प्लेसमेंट कहा जाता है। वेब सीरीज बनाते समय ही कई ब्रांड्स अपने प्रोडक्ट को प्रमोट कराने के लिए नेटफ्लिक्स को मोटी रकम दे देते हैं। यह प्रचार अलग से विज्ञापन के तौर पर नहीं बल्कि सीरीज की कहानी का हिस्सा ही बन जाता है।

टेलीकॉम कंपनियों के साथ साझेदारी

आपने मोबाइल रिचार्ज करते समय ध्यान दिया होगा कि अगर आप रेगुलर कीमतों से थोड़ा सा ज्यादा महंगा रिचार्ज प्लान लेते हैं तो आपको फ्री में किसी ने किसी OTT प्लेटफॉर्म का या फिर नेटफ्लिक्स का सब्सक्रिप्शन भी मिल जाता है। बेशक आपको यह सौदा बहुत सस्ता लगे, लेकिन लाखों यूजर्स के हिसाब से देखें तो नेटफ्लिक्स को इससे हर महीने करोड़ रुपए का फायदा होता है। यह भी नेटफ्लिक्स की कमाई का एक मोटा हिस्सा है। साथ ही बिना ज्यादा मार्केटिंग खर्च किए नए सब्सक्राइबर भी मिल जाते हैं।

Netflix Games से कमाई

नेटफ्लिक्स ने अपने प्लेटफॉर्म पर मोबाइल गेम्स की शुरुआत की है, जो सब्सक्राइबर्स के लिए फ्री हैं। इन गेम्स में न तो विज्ञापन होते हैं और न ही इन-ऐप परचेज। हालांकि इससे सीधी कमाई नहीं होती, लेकिन इसका बड़ा फायदा यूजर रिटेंशन है। जब यूजर ऐप पर ज्यादा समय बिताता है, तो सब्सक्रिप्शन कैंसिल करने की संभावना कम हो जाती है। इसे इंडायरेक्ट रेवेन्यू स्ट्रैटेजी कहा जाता है। लंबे समय में यही रणनीति नेटफ्लिक्स की सब्सक्रिप्शन इनकम को स्थिर और मजबूत बनाए रखती है।

थिएटर रिलीज़ से होने वाली कमाई

कुछ बड़ी फिल्मों को नेटफ्लिक्स पहले चुनिंदा सिनेमाघरों में रिलीज करता है और बाद में OTT पर लाता है। इससे कंपनी को बॉक्स ऑफिस से सीधी कमाई मिलती है। इसके अलावा थिएटर रिलीज़ से फिल्म को इंटरनेशनल अवॉर्ड्स के लिए योग्य बनाया जा सकता है। सिनेमाघरों में रिलीज़ से मिलने वाली चर्चा और ब्रांड वैल्यू बाद में OTT पर व्यूअरशिप बढ़ाने में मदद करती है। यह रणनीति खासतौर पर हाई-बजट फिल्मों के लिए अपनाई जाती है, ताकि एक ही कंटेंट से थिएटर और डिजिटल दोनों स्तरों पर रिटर्न मिल सके।

डेटा एनालिटिक्स से नुकसान बचाकर कमाई

नेटफ्लिक्स यूजर्स के देखने के हर पैटर्न का डेटा एनालिसिस करता है। कौन सा शो पूरा देखा गया, कहाँ छोड़ा गया और किस तरह का कंटेंट ज्यादा पसंद किया जा रहा है, यह सब डेटा के जरिए समझा जाता है। इसी आधार पर नए शोज़ और फिल्मों में निवेश किया जाता है। इससे फ्लॉप कंटेंट का रिस्क काफी हद तक कम हो जाता है। सीधे तौर पर यह कमाई नहीं दिखती, लेकिन गलत फैसलों से बचाकर कंपनी के हजारों करोड़ रुपये बचाता है। यही डेटा स्ट्रैटेजी नेटफ्लिक्स की असली ताकत मानी जाती है।

मर्चेंडाइज और लाइसेंसिंग से होने वाली कमाई

कुछ सीरीज या फिल्में इतनी ज्यादा पॉपुलर हो जाती है कि उनकी कमाई स्क्रीन से बाहर निकल जाती है। इसका ताजा उदाहरण स्ट्रेंजर थिंग्स सीरीज से लिया जा सकता है। नेटफ्लिक्स ने स्ट्रेंजर थिंग्स सीरीज के पांच सीजन पर तकरीबन 7000 करोड़ रुपये खर्च किए हैं। नेटफ्लिक्स ने इस पूरी सीरीज में सिर्फ प्रोडक्ट प्लेसमेंट करके तकरीबन ढाई सौ करोड़ का कलेक्शन किया है। इसके अलावा मर्चेंडाइज लाइसेंस मॉडल के तहत कई टॉयज, कपड़े और भी कई तरह के प्रोडक्ट्स लॉन्च किए हैं। जिनसे भी नेटफ्लिक्स की बंपर कमाई हो रही है।

एक रिपोर्ट के मुताबिक केवल स्ट्रेंजर थिंग्स से USA इकोनॉमी में लगभग 1.4 बिलियन डॉलर का ग्रोथ हुआ है। इस सीरीज को देखने के लिए लगभग 20 लाख नए सब्सक्रिप्शन मिले हैं। जिससे नेटफ्लिक्स की 3600 करोड़ रुपये की अलग कमाई हुई है।
कुल मिलाकर Netflix Revenue Mode उन सभी तरीकों से पैसे कमाने की कोशिश करता है, जो संभव है। फिर चाहे लोगों को स्क्रीन पर कोई प्रोडक्ट दिखाना हो या किसी बड़े ब्रांड का जिक्र करना हो। नेटफ्लिक्स कोई मौका नहीं छोड़ता। बाकी अपने नेटफ्लिक्स का कौन सा प्लान सब्सक्राइब किया हुआ है? कमेंट सेक्शन में जरूर बताएं।