ग्राहकों द्वारा ईएमआई (EMI) के भुगतान को लेकर भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) एक नया नियम लाने पर विचार कर रहा है। यह प्रस्ताव उन ग्राहकों के लिए महत्वपूर्ण होगा जिन्होंने स्मार्टफोन, स्मार्ट टीवी, रेफ्रिजरेटर, वॉशिंग मशीन या यहाँ तक कि इलेक्ट्रिक वाहन जैसे महंगे इलेक्ट्रॉनिक सामान छोटे व्यक्तिगत ऋण (Personal Loans) या ईएमआई पर खरीदे हैं।
इस नियम के बदलाव से क्या होगा?
इस संभावित नियम के तहत, यदि कोई ग्राहक समय पर अपने ऋण की EMI नहीं चुकाता है, तो ऋणदाता रिमोट लॉकिंग (Remote Locking) तकनीक का उपयोग करके ग्राहक के डिवाइस को अस्थाई रूप से निष्क्रिय कर सकते हैं। यह कदम खासकर ₹1 लाख तक के छोटे उपभोक्ता ऋणों (Small-ticket Consumer Loans) में बढ़ती डिफॉल्ट दर (Default Rate) से निपटने के लिए उठाया जा रहा है।
हालांकि, RBI ने इस संबंध में उपभोक्ता अधिकारों और डेटा गोपनीयता की सुरक्षा पर विशेष जोर दिया है। प्रस्ताव के अनुसार, ऋणदाताओं को डिवाइस को लॉक करने की सुविधा तभी मिलेगी जब उन्होंने ऋण समझौते के समय ग्राहक की स्पष्ट सहमति (Explicit Consent) प्राप्त की हो। डिवाइस लॉक होने के बावजूद, ग्राहक की व्यक्तिगत जानकारी (Personal Data) तक ऋणदाता की पहुँच नहीं होगी, और डिवाइस पर आपातकालीन कॉल (Emergency Calls) की सुविधा बनी रहेगी।
कई देशों, जैसे कनाडा और नाइजीरिया, में ऐसे नियम पहले से लागू हैं। भारत में, यह एक प्रकार का वसूली उपकरण (Recovery Tool) होगा, जो ऋणदाताओं को खराब ऋण (Bad Loans) को कम करने में मदद करेगा, लेकिन साथ ही यह डिजिटल सेवाओं पर निर्भर ग्राहकों के लिए चिंता भी पैदा करता है। RBI फिलहाल इस प्रस्ताव पर बैंकों, एनबीएफसी (NBFCs) और अन्य हितधारकों के साथ चर्चा कर रहा है। यह नियम अभी लागू नहीं किया गया है, लेकिन यदि इसे अंतिम रूप दिया जाता है, तो यह देश में ईएमआई-आधारित खरीदारी और ऋण वसूली के तरीके को बदल सकता है।








