कौन हैं देवव्रत महेश रेखे जिन्होंने महज 19 साल की उम्र वो कर दिखाया जिसे 200 सालों से कोई नहीं कर पाया

By: महेश चौधरी

Last Update: December 28, 2025 6:11 AM

mahesh rekhe
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भारतीय सांस्कृतिक धरोहर को संरक्षित करने और भक्ति के आध्यात्मिक पथ को आगे बढ़ाने के लिए आज भी नई पीढ़ी काम में जुटी हुई है। इसका सबसे जीवंत उदाहरण महाराष्ट्र के आहिल्यानगर के रहने वाले देवव्रत महेश रेखे हैं। जिन्होंने कठिन और अनुशासित आध्यात्मिक साधना से न केवल महाराष्ट्र को बल्कि पूरे देश को गर्व से भर दिया है। मात्र 19 वर्ष की आयु में महेश रेखे ने जो कारनामा किया है, उसके आगे तो देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी दंडवत होने को मजबूर हो गए और उन्होंने देवव्रत महेश की तारीफों के पुल बांध दिए। महेश ने जो आध्यात्मिक कारनामा किया है, वह पिछले 200 सालों में किसी ने नहीं किया। तो चलिए जानते हैं देवव्रत महेश रेखे ने ऐसा क्या किया है और मोदी जी ने क्या प्रतिक्रिया दी है।

कौन हैं देवव्रत महेश रेखे?

महेश रेखे श्री वल्लभराम शालिग्राम संघवेद विद्यालय वाराणसी के छात्र है। जो वैदिक अध्ययन और शास्त्रीय परंपरा में अपनी शिक्षा पूरी कर रहे हैं। हालांकि इन्होंने ‘दण्डकर्म पारायणम्’ में जो उपलब्धि हासिल की है वह उनकी शिक्षा से बिल्कुल अलग है। इसे वेद अध्ययन की सबसे दुर्लभ और कठिन परीक्षाओं में से एक माना जाता है। इस परीक्षा में परीक्षार्थी को 2000 मंत्रों को एक साथ कंठस्थ सुनना और सुनाना होता है। जिसकी विशेषता यह है कि दो पदों का उच्चारण उल्टा व सीधा एक साथ किया जाता है। वह भी बिना किसी गलती के। लय स्वर और ध्वनि सब एकदम सटीक होनी चाहिए। तभी विद्यार्थी को उत्तीर्ण माना जाता है। इसी वजह से यह अत्यंत श्रमसाध्य और मासिक आध्यात्मिक तपस्या का चरम स्तर छू लेती है। यानी एक ऐसा कारनामा जो इंसानी मस्तिष्क के लिए लगभग नामुमकिन होता है। देवव्रत ने इस चुनौती के लिए रोजाना 4 घंटे सुबह 8:00 बजे से 12:00 बजे तक अभ्यास किया था। उनके गुरु और विश्वविद्यालय के विद्वानों के अनुसार इस स्तर की साधना के लिए एकाग्रता, स्मरण शक्ति, श्वास नियंत्रण और आध्यात्मिक समर्पण बेहद जरूरी होता है।

विश्वविद्यालय के विद्वानों ने बताया कि देवव्रत महेश ने लगभग 200 वर्ष पुराने रिकॉर्ड को तोड़कर यह खिताब अपने नाम किया है। इससे पहले यह कारनामा 200 वर्ष पहले नासिक में देव मूर्ति नारायण शास्त्री ने किया था।

दंडक्रम पारायण (Dandakrama Parayanam) क्या होता है?

दंडक्रम पारायणम् (Dandakrama Parayanam) एक कठिन अभ्यास है। जिसमें शुक्ल यजुर्वेद माध्यन्दिन शाखा के 2000 मंत्रों वाले ‘दण्डकर्म पारायणम्’ का पाठ किया जाता है। जिसमें अनेक ऋचाएं, वैदिक स्वर,विशिष्ट उच्चारण शैली और पवित्रम मंत्र सम्मिलित होते हैं। इनका शुद्ध उच्चारण करना काफी मुश्किल है। साथ ही इसके पदों को एक बार सीधा और एक बार उल्टा पढ़ा जाता है। जिस से इन्हें पढ़ना और ज्यादा कठिन हो जाता है।

मोदी और योगी जी ने की तारीफ

देवव्रत महेश की उपलब्धि पर देशभर गर्व कर रहा है। उनके इस रिकॉर्ड की खबर सुनते ही योगी आदित्यनाथ ने भी उन्हें बधाई दी है और कहा कि यह साधना पूरे आध्यात्मिक जगत के लिए प्रेरणा का नवदीप बनी है। दूसरी ओर देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X के माध्यम से देवव्रत महेश को बधाई दी है। वह लिखते हैं 19 वर्ष के देवव्रत महेश रेखे ने जो उपलब्धियां हासिल की है वह जानकर मन प्रफुल्लित हो गया हैं। उनकी यह सफलता हमारी आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगी। भारतीय संस्कृति में आस्था रखने वाले हर एक व्यक्ति को यह जानकर अच्छा लगेगा कि श्री देवव्रत ने शुक्ल यजुर्वेद की माध्यन्दिन शाखा के 2000 मंत्रों वाले ‘दण्डकर्म पारायणम्’ को 50 दिनों में बिना किसी अवरोध के पूर्ण किया है। मोदी जी ने देवव्रत महेश की इस उपलब्धि पर प्रतिक्रिया देकर देश दुनिया का ध्यान भारतीय संस्कृति की ओर खींचा है।