बॉलीवुड में आइटम सॉन्ग की शुरुआत कैसे हुई? जानें किस फिल्म ने शुरू किया था आइटम सॉन्ग का ट्रेंड ?

By: महेश चौधरी

Last Update: January 2, 2026 3:24 PM

Bollywood item song evolution
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बॉलीवुड और आइटम सॉन्ग्स का रिश्ता दशकों पुराना है। फिर चाहे स्त्री-2 में तमन्ना भाटिया का वायरल डांस आज की रात हो या 90 के दशक में तहलका मचाने वाला चोली के पीछे क्या है… आज फिल्म की सफलता के लिए एक कैची आइटम नंबर लगभग जरूरत बन चुका है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि आज जो आइटम सॉन्ग्स ट्रेंडसेटर बन चुके हैं, इस ग्लैमरस तड़के की शुरुआत असल में हुई कहाँ से थी? बॉलीवुड के इतिहास में वो कौन सी पहली फिल्म थी जिसने इस एक्सपेरिमेंट को जन्म दिया? अगर आप भी सिनेमा के इस अनसुने सफर और पहली आइटम गर्ल के बारे में जानना चाहते हैं, तो Khabardaari.com के इस खास लेख को आखिर तक जरूर पढ़ें…

पहले गाने सिर्फ कहानी का हिस्सा हुआ करते थे

पुराने दौर में फिल्में गानों के लिए नहीं जानी जाती थीं। उस वक्त गाना सिर्फ कहानी को आगे बढ़ाने का एक छोटा सा जरिया था। ज्यादातर गाने कोठियों या दरबारों में फिल्माए जाते थे। उस दौर की हीरोइनें नाचने से बचती थीं। डांस के लिए अलग से स्पेशल डांसर्स बुलाए जाते थे। लेकिन धीरे-धीरे दर्शकों की पसंद बदलने लगी। मेकर्स को समझ आ गया कि एक दमदार गाना फिल्म की किस्मत बदल सकता है। यहीं से आइटम सॉन्ग का जन्म हुआ।

बॉलीवुड का पहला आइटम सॉन्ग और नई शुरुआत

50 के दशक में बॉम्बे सिनेमा की पहली असली डांसिंग क्वीन कुक्कू मोरे थीं। एक एंग्लो-इंडियन लड़की, जो कैबरे डांस में माहिर थी और उस जमाने में एक गाने के 6000 रुपये लेती थी। लेकिन कुक्कू की सबसे बड़ी देन बॉलीवुड को हेलेन के रूप में मिली। कुक्कू ने ही हेलेन को वह वेस्टर्न स्टाइल और बोल्ड एक्सप्रेशन सिखाए, जिसने आगे चलकर इतिहास रच दिया।

1958 की फिल्म हावड़ा ब्रिज का गाना मेरा नाम चिन चिन चू बॉलीवुड का पहला मुकम्मल आइटम सॉन्ग बना। इसके बाद तो दो दशकों तक आइटम नंबर का दूसरा नाम ही हेलेन हो गया। पिया तू अब तो आजा से लेकर महबूबा महबूबा तक, हेलेन ने ग्लैमर को एक नई ऊंचाई दी।

बिंदु और अरुणा ईरानी का दौर

हेलेन के बाद 70 के दशक तक आते-आते बॉलीवुड का मिजाज पूरी तरह बदल गया। आइटम सॉन्ग अब पहले से कहीं ज्यादा बोल्ड और असरदार हो गए थे। इस दौर में बिंदु ने अपनी अदाओं से तहलका मचा दिया। उन्होंने जंजीर फिल्म में मोना डार्लिंग का किरदार निभाया और मेरा नाम है शबनम जैसे गानों से एक नया ट्रेंड सेट किया। बिंदु ने दिखाया कि एक आइटम गर्ल सिर्फ नाचने वाली नहीं, बल्कि फिल्म की एक मजबूत और ग्लैमरस विलेन भी हो सकती है।

वहीं दूसरी तरफ अरुणा ईरानी ने आइटम नंबर्स को एक अलग पहचान दी। उन्होंने मुजरा और कव्वाली जैसी पारंपरिक शैलियों में ग्लैमर का जबरदस्त तड़का लगाया। कारवां फिल्म का दिलबर दिलबर हो या बॉम्बे टू गोवा के गाने, उनकी एनर्जी और डांस स्टेप्स दर्शकों को थियेटर खींच लाते थे। अब ये गाने केवल मनोरंजन का साधन नहीं रहे थे, बल्कि फिल्म को सुपरहिट कराने की सबसे बड़ी गारंटी बन चुके थे। मेकर्स भी समझ गए थे कि फिल्म की कहानी चाहे जो भी हो, एक धमाकेदार आइटम नंबर बॉक्स ऑफिस पर पैसा वसूल करा ही देगा।

भाड़े की डांसर्स की जगह ली हेरोइन ने

90 का दशक बॉलीवुड के लिए एक बड़ा टर्निंग पॉइंट साबित हुआ। इस दौर में आइटम सॉन्ग और मेनस्ट्रीम सिनेमा के बीच की दीवार पूरी तरह ढह गई। अब फिल्मों के लिए बाहर से स्पेशल डांसर्स बुलाने की जरूरत खत्म होने लगी थी। इसकी सबसे बड़ी वजह यह थी कि खुद फिल्म की लीड हीरोइनें इन गानों की ताकत समझ चुकी थीं। माधुरी दीक्षित ने चोली के पीछे और धक-धक जैसे गानों से साबित कर दिया कि एक बड़ा सितारा जब खुद डांस करता है, तो जादू कुछ और ही होता है।

इसके बाद रवीना टंडन ने तू चीज़ बड़ी है मस्त-मस्त और शिल्पा शेट्टी ने यूपी बिहार ले ले से आइटम नंबर्स को अपना लिया। अब ये गाने किसी भी फिल्म के प्रमोशन का सबसे बड़ा हिस्सा बन चुके थे। 2000 के दशक तक आते-आते यह चलन इतना आम हो गया कि कैटरीना कैफ (शीला की जवानी) और मलाइका अरोड़ा मुन्नी बदनाम हुई जैसे गानों ने पूरी फिल्म की सफलता अपने कंधों पर उठा लिया। आज आलम यह है कि स्त्री-2 में तमन्ना भाटिया हो या पुष्पा में सामंथा, बिना एक जबरदस्त स्पेशल नंबर के बॉलीवुड की कोई भी बड़ी फिल्म अधूरी मानी जाती है।